RationalSpace

Farid

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​वेख फरीदा मिट्टी खुल्ली, (कबर)
मिट्टी उत्ते मिट्टी डुली; (लाश)

मिट्टी हस्से मिट्टी रो​​वे, (इंसान)
अंत मिट्टी दा मिट्टी होवे (जिस्म)

ना कर बन्दया मेरी मेरी, (पैसा)
ना ऐह तेरी ना ऐह मेरी; (खाली जाना)

चार दिना दा मेला दुनिया, (उम्र)
फ़िर मिट्टी दी बन गयी ढेरी; (मौत)

ना कर एत्थे हेरा फेरी, (पैसे कारन झुठ, धोखे)
मिट्टी नाल ना धोखा कर तू, (लोका नाल फरेब)

तू वी मिट्टी मैं वी मिट्टी; (इंसान)
जात पात दी गल ना कर तू,

जात वी मिट्टी पात वी मिट्टी, (पाखंड)
*जात सिर्फ खुदा दी उच्ची,

बाकी सब कुछ मिट्टी मिट्टी*

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Written by rationalspace

October 27, 2016 at 4:21 pm

Posted in Random

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